आखिर क्या है, पूनम छाबड़ा के शराबबंदी आंदोलन की हकीकत ???

क्या पुलिस गिरफ्तारी से थम गया है पूनम का शराबबंदी आंदोलन ?

आखिर क्या है, पूनम छाबड़ा के शराबबंदी आंदोलन की हकीकत ???
पूनम छाबड़ा
जयपुर (जितेन्द्र शर्मा)। ‘‘सरकार अपना ले कोई हथकंडा, हम ना झुकेंगे, ना रुकेंगे’’, मैं विपरीत परिस्थतियों में भी अनशन करने के लिए संकल्पबद्ध हूं। इस दौरान यदि स्व. गुरुशरण छाबड़ा की तरह शहादत भी देनी पड़़ी तो मुझे मंजूर है, लेकिन संपूर्ण शराब बंदी से कम मंजूर नहीं।’’ ‘‘प्रदेश के हित के लिए अगर मेरी शहादत भी हो जाती हे तो यह मेरा सौभाग्य होगा।’’ ‘‘मैं जेल जाने को भी तैयार हूं और जेल में भी अनशन करूंगी।’’ 
 
इस प्रकार के आंदोलनकारी बोल बोलकर राजस्थान में जोर-शोर से संपूर्ण शराबबंदी का आंदोलन का राग छेड़ने वाली पूर्व विधायक स्व. गुरूशरण छाबड़ा की पुत्रवधू और ‘‘जस्टिस फाॅर छाबड़ा’’ संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम अंकुर छाबड़ा का संपूर्ण शराबबंदी आंदोलन इन दिनों मानों थम ही गया है।
प्रदेश की वसुन्धरा राजे सिंधिया सरकार के खिलाफ शराबबंदी का मोर्चा खोलकर एकबारगी तो ऐसा लगा कि पूनम छाबड़ा अपनी जिद पर डटी रहकर वसुन्धरा सरकार से मांगों को मनवाकर ही रहेंगी। लेकिन प्रदेश की महिला मुख्यमंत्री के सामने महिला आंदोलनकारी की रणनीति शायद सरकार के सामने बौना ही साबित हो रही है।
छाबड़ा की मौत के बाद उनके छोटे बेटे अंकुर छाबड़ा की पत्नी पूनम छाबड़ा ने अपने ससुर पूर्व विधायक स्व. गुरूशरण छाबड़ा की शराबबंदी और सशक्त लोकायुक्त आंदोलन की मुहिम को उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए संपूर्ण शराबबंदी आंदोलन की मुहिम की गति और तेज कर दी। इसके लिए पूनम छाबड़ा ने राजस्थान प्रदेश के कई जिलों व संभाग स्तर पर अपनी टीमों का गठन कर सैकड़ों प्रतिनिधियों के हाथों संपूर्ण शराबबंदी आंदोलन की बागडोर सौंप दी।

आखिर क्या है, पूनम छाबड़ा के शराबबंदी आंदोलन की हकीकत ???

‘‘इंवेस्टिगेशन मीडिया’’ की पड़ताल में सामने आया है कि इस आंदोलन को अपने अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूनम अपने प्रतिनिधियों के साथ चर्चा व मुलाकातें कर नई-नई रणनीतियां बनाने लगीं और अपने प्रतिनिधियों व कार्यकर्ताओं के साथ प्रदेश के कई क्षेत्रों में जाकर संपूर्ण शराबबंदी आंदोलन में भाग लेने के लिए लोगों को एकजुट करने का सिलसिला शुरू कर दिया। हालांकि, पूनम छाबड़ा के इस संपूर्ण शराबबंदी आंदोलन का कुछ सामाजिक संगठनों व व्यापारिक संगठनों ने अपना समर्थन भी दिया।

अब, जब पूनम छाबड़ा को लगा कि उनकी टीमें मजबूत हो चुकी हैं, उसके बाद वे शराब ठेकेदारों के खिलाफ उनकी दुकानें बंद करवाने के लिए मैदान में उतरी। इस के मध्यनजर पूनम छाबड़ा ने जनता का समर्थन मांगकर शराब ठेकेदारों की दुकानों को बंद करवाने के लिए जगह-जगह धरने-प्रदर्शन भी किए।

रहस्य का आंदोलन : 

पूनम छाबड़ा पिछले 2 साल से बार-बार मीडिया को बुलाकर कभी कहती है कि मैं भूख हड़ताल करूंगी, कभी कहती हैं कि मैं जेल जाउंगी, कभी पूजा छाबड़ा की विरोधी बन जाती हैं और अचानक सिस्टम से गायब हो जाती हैं। लेकिन हकीकत क्या है यह शायद ही कोई जानता हो। आखिर यह कैसा आंदोलन है जो ना तो शुरू हो पा रहा है और ना ही खत्म हो पा रहा है। अब आंदोलन कब शुरू होगा और कब खत्म होगा यह भी एक रहस्य बना हुआ है।

उम्मीद बांधकर बैठी है मासूम जनता : 

यह कैसी बिडम्बना है कि इस राज्य को बीमारू राज्य का तो दर्जा पहले से ही प्राप्त है और अब शराबबंदी आंदोलन के नाम पर जनता की सहानुभूति बटोरने का नया सिलसिला स्व. गुरूशरण छाबड़ा के निधन के बाद 2 साल से शुरू हो गया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि कि शराब के नुकसानों से ग्रस्त राज्य की जनता टकटकी लगाकर बैठी है कि राजस्थान राज्य में आखिर कब होगी संपूर्ण शराबबंदी।

अनुमति के बिना ही चल दीं अनशन के लिए :

‘‘इंवेस्टिगेशन मीडिया’’ की पड़ताल में सामने आया है कि पूनम छाबड़ा के नेतृत्व में उनके समर्थक शहीद स्मारक पर धरना देने वाले थे, लेकिन जिला प्रशासन की ओर अनुमति नहीं दी गई। पूर्व में अनशन करते हुए पूर्व विधायक छाबड़ा की मृत्यु हो गई थी, इसलिए इस बार पूनम छाबड़ा के अनशन को प्रशासन ने अनुमति ही नहीं दी। उसके बाद गत् 9 जून को अनशन शुरू करने के लिए बिना अनुमति के ही बड़ी संख्या में लोग पूनम के नेतृत्व में स्मारक की ओर जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने पूनम छाबड़ा सहित उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया था।

आखिर क्या है, पूनम छाबड़ा के शराबबंदी आंदोलन की हकीकत ???
फाइल फोटो

और पुलिस ने नाममात्र के लिए किया था पूनम छाबड़ा को गिरफ्तार :

9 जून 2017 : 
संपूर्ण शराबबंदी आंदोलन के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने वाली ‘‘जस्टिस फाॅर छाबड़ा’’ की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम छाबड़ा गत् 9 जून को पूरे नाटकीय मोड़ में शहर में एमआई रोड़ स्थित पांच बत्ती पर अनशन के मैदान में उतरी। लेकिन अनशन शुरू होने से पहले पुलिस पुलिस ने पूनम छाबड़ा सहित उनके समर्थकों को भी गिरफ्तार कर लिया था।

कब-कब क्या बोलीं पूनम छाबड़ा : 

28 मई 2017 : 
शहादत होना होगा मेरा सौभाग्य : 
पूनम छाबड़ा ने 28 मई 2017 को कहा था कि शराब के कारण पूरे प्रदेश का वातावरण दूषित है, घर परिवार तबाह हो रहे हैं, सरकार अगर 8 जून तक शराब बंदी की ओर नहीं बढ़ती है तो मैं 9 जून से गुरुशरण जी छाबड़ा की जयंती से अनशन करने जा रही हूं और ‘‘प्रदेश के हित के लिए अगर मेरी शहादत भी हो जाती है तो यह मेरा सौभाग्य होगा।’’
6 जून 2017 : 
जेल जाने को भी हूं तैयार : 
पूनम छाबड़ा ने 6 जून 2017 को कहा था कि राज्य सरकार मेरे अनशन से घबराकर स्व. छाबड़ा की जयंती पर किए जाने वाले अनशन के लिए अनशन स्थल की अनुमति ना देकर मेरे ऊपर अनैतिक दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन मैं दबने वालों में से नहीं हूं। ‘‘मैं जेल जाने को भी तैयार हूं और जेल में भी अनशन करूंगी।’’

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फाइल फोटो

14 जून 2017 :

सरकार अपना ले कोई हथकंडा, ‘‘हम ना झुकेंगे, ना रुकेंगे’’ :

स्व. छाबड़ा की जयंती के अवसर पर घोषित अनशन से पूर्व गत् 9 जून को पूनम अंकुर छाबड़ा की गिरफ्तारी से समर्थकों में रोष व्याप्त होने से उन्होंने पूनम छाबड़ा के निवास पर पहुंच कर कहा था कि पूनम छाबडा को गिरफ्तार करना सरकार की हताशा का परिचायक है। इस दौरान 14 जून 2017 को पूनम छाबड़ा ने कहा था कि प्रदेश की संवेदनहीन सरकार चाहे कोई हथकंडा अपना ले लेकिन ‘‘हम ना झुकेंगे, ना रुकेंगे।’’ 

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फाइल फोटो

29 मई 2017 : 

हाई पॉवर कमेटी की मीटिंग का भी कर दिया था बहिष्कार : 

सरकार ने हाई पॉवर कमेटी की मीटिंग रख वार्ता के लिए पूनम छाबड़ा को आमंत्रित भी किया था लेकिन अनशन के संकल्प पर अडिग पूनम छाबडा ने हाई पॉवर कमेटी की मीटिंग का भी बहिष्कार कर दिया था। पूनम ने कहा था कि ‘‘मैं विपरीत परिस्थतियों में भी अनशन करने के लिए संकल्पबद्ध हूं। इस दौरान यदि स्व. गुरुशरण छाबड़ा की तरह शहादत भी देनी पड़ी तो मंजूर है, लेकिन संपूर्ण शराब बंदी से कम मंजूर नहीं।’’

आखिर क्या है, पूनम छाबड़ा के शराबबंदी आंदोलन की हकीकत ???
पूनम छाबड़ा

…आखिर कौन है पूनम छाबड़ा : 

हम आपको बता दें कि श्रीगंगानगर के पूर्व विधायक स्व. गुरूशरण छाबड़ा ने प्रदेश सरकार के खिलाफ संपूर्ण शराबबंदी आंदोलन मुहिम की शुरूआत की थी।

स्व. छाबड़ा ने सरकार के खिलाफ संपूर्ण शराबबंदी आंदोलन और सशक्त लोकपाल की पहल का मोर्चा खोल दिया था। कई बार प्रदेश सरकार से मुलाकातें भी हुई व इन मुलाकातों में कई प्रकार के आश्वासन भी सरकार की ओर से मिले।

बाद में 69 वर्ष के छाबड़ा 2 अक्टूबर 2015 से 31 दिन तक आमरण अनशन पर रहे और इस दौरान उनकी तबियत खराब हो गई। उसके बाद उन्हें राजधानी के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और उनका निधन हो गया।

बहरहाल, पूनम छाबड़ा जब-जब भी शराबबंदी आंदोलन की शुरूआत करती हैं तो प्रदेश की मासूम जनता अपने हाथ में विरोध का झंडा और मुंह पर सरकार विरोधी नारे लगाकर पूनम छाबड़ा के साथ हो लेती है।

उम्मीद की आस बांधकर बैठी प्रदेश की मासूम जनता यह जानना चाहती है कि सैकड़ों बार शराबबंदी आंदोलन का राग अलापने वालीं पूनम के आंदोलन से पैर पीछे हटाने के पीछे आखिर क्या मजबूरी है पूनम छाबड़ा की।


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