किंग्स इलेवन पंजाब के सह मालिक नेस वाडिया ने कहा- देश हित में चीन के स्पाॅन्सर की जगह पर इंडियन स्पॉन्सर खोजना चाहिए

किंग्स इलेवन पंजाब के सह मालिक नेस वाडिया ने कहा- देश हित में चीन के स्पाॅन्सर की जगह पर इंडियन स्पॉन्सर खोजना चाहिए


  • बीसीसीआई ने इस हफ्ते लीग की स्पॉन्सरशिप डील के रिव्यू के लिए जरूरी मीटिंग बुलाई है, वहीं सोमवार को सरकार ने चीन के 59 मोबाइल ऐप को बंद कर दिया है
  • आईपीएल की टाईटल स्पॉन्सर वीवो बोर्ड को हर साल 440 करोड़ रुपए देती है, इसके साथ पांच साल का करार 2022 में खत्म होगा

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 09:33 PM IST

नई दिल्ली. लद्दाख की गलवान घाटी में चीन की सेना से हुई झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे, इसके बाद से चीन की कंपनियों के बहिष्कार की मांग हो रही है। आईपीएल की एक टीम किंग्स इलेवन पंजाब के सह-मालिक नेस वाडिया ने भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को देखते हुए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से चीन के कंपनियों का करार खत्म करने और चीन के सामान के बहिष्कार करने की मांग की है।

हालांकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने पहले ही आईपीएल स्पॉन्सरशिप को रिव्यू करने का फैसला कर लिया है। बोर्ड ने इस हफ्ते लीग की स्पॉन्सरशिप डील के रिव्यू के लिए जरूरी मीटिंग बुलाई है। इससे पहले ही सोमवार को सरकार ने चीन के 59 मोबाइल ऐप को बंद कर दिया है।

वाडिया ने कहा कि देश के हित में आईपीएल से चीन के कंपनियों के साथ हमें करार खत्म करना चाहिए। देश हित पहले है और पैसा बाद में है। उन्होंने कहा कि आईपीएल के लिए इंडियन स्पाॅन्सर खोजना चाहिए। हालांकि शुरू में परेशानी होगी, लेकिन मुझे भरोसा है कि बहुत सी भारतीय कंपनियां मिल जाएंगी, जो चीन की कंपनियों की जगह ले सकती हैं। वाडिया ने कहा कि चेन्नई सुपर किंग्स सहित कई टीमों ने कहा है कि वह सरकार के हर फैसले के साथ हैं।

वीवो कंपनी के साथ 440 करोड़ रूपए का करार

आईपीएल की टाईटल स्पॉन्सर वीवो बोर्ड को हर साल 440 करोड़ रुपए देती है। इसके साथ पांच साल का करार 2022 में खत्म होगा। 

पेटीएम में भी अलीबाबा की हिस्सेदारी

वीवो के अलावा मोबाइल पेमेंट सर्विस पेटीएम की भी आईपीएल की स्पॉन्सरशिप डील का हिस्सा है। इस कंपनी में भी चीन की कंपनी अलीबाबा ने निवेश किया है। पेटीएम में अलीबाबा की हिस्सेदारी 37.15 फीसदी है। इसके अलावा चीन की वीडियो गेम कंपनी टेनसेंट का स्वीगी और ड्रीम-11 में 5.27 फीसदी की हिस्सेदारी है। यह सभी चीनी कंपनियां बीसीसीआई की स्पॉन्सर हैं। 

टीम इंडिया की जर्सी स्पॉन्सर बायजू में भी चीनी कंपनी की हिस्सेदारी
वहीं, टीम इंडिया की मौजूदा जर्सी स्पॉन्सर बायजू में भी चीनी कंपनी टेनसेंट की हिस्सेदारी है। बायजू ने पिछले साल ही बीसीसीआई से पांच साल का करार किया है। इसके तहत वह बोर्ड को 1079 करोड़ रुपए देगा।



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