क्राउडफंडिंग है एक नई सुबह की आहट

विज्ञान एवं तकनीक के इस युग ने मनुष्य को कई सौगातें दी हैं, जीने का नया तरीका दिया है, सोच को बदला है और  जीवन को सुगम बनाने की कोशिश की गयी है।  ऐसी ही एक आधुनिक सौगात है क्राउडफंडिंग। विदेशों में यह लगभग  स्थापित हो चुकी है और भारत में इसका चलन तेजी से बढ़ रहा है। तमाम सार्वजनिक योजनाओं, धार्मिक कार्यों, जनकल्याण उपक्रमों  और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग इसका सहारा ले रहे हैं। यह भारतीय चन्दे का आयात किया हुआ एक स्वरूप है, एक प्रक्रिया है।

‘चंदा’ हमारे देश की बहुप्रचलित एवं अति प्राचीन परंपरा है. हिंदू धर्म में सत्संग, दुर्गा पूजा, कांवड यात्रा, अनुष्ठान, यज्ञ जैसे कार्यक्रमों के सफल आयोजन का आधार चंदा ही रहा है। साथ-ही-साथ शिक्षा संस्थान, अस्पताल, धर्मशाला, वृद्धाश्रम, महिला आश्रम आदि भी चन्दे की सहायता से पूरे होते रहे है। इसके अलावा  दूसरे धर्मों में भी चंदा  मांगकर सार्वजनिक एवं आस्था के कार्य पूरे किए जाते रहे हैं। भारत में प्रचलित किसी सार्वजनिक आयोजन को लेकर लिए और दिये जाने वाले ‘चंदे’ का चलन विदेशों में ‘क्राउड फंडिंग’ के रूप में तेजी से बढ़ा। चंदे  एवं क्राउड फंडिंग में जो मूल फर्क देखने को मिलता है, वह यह है कि  चन्दा प्रायः धार्मिक कार्यों के लिये  ही दिया जाता रहा है जबकि क्राउड फंडिंग का क्षेत्र व्यापक है और इसमें धार्मिक कार्यों के साथ-साथ अन्य सार्वजनिक कार्य या व्यावसायिक कार्य जैसे पुल बनवाना, मोहल्ले की सफाई कराना, सड़क बनवाना या फिर फिल्म बनाने का काम हो, या पत्रकारिता से जुड़ा उपक्रम हो, इनमें क्राउंड फंडिंग का इस्तेमाल अब आम हो गया है।

भारत में ‘क्राउड फंडिंग’ का चलन तेजी से बढ़ रहा है। तमाम सार्वजनिक योजनाओं और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग  इसका सहारा ले रहे हैं। अनेक हिन्दी फिल्में क्राउडफंडिंग के सहारे बनी हैं। अब विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है।  पुणे के कुछ युवाओं ने इसके लिए ‘इग्नाइट इंटेंट’ नाम की वेबसाइट बनाई है। लेकिन हाल ही में अनेक क्षेत्रों में प्रभावी प्रस्तुति एवं हिस्सेदारी के लिये क्राउडफंडिंग मंच इम्पैक्ट गुरु का लोकार्पण भव्य रूप में  हुआ है। इसके कार्यकारी अधिकारी पीयूष जैन है, जिनकी भावी योजनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले समय में क्राउडफंडिंग न केवल जीवन का हिस्सा बनेगा बल्कि अनेक बहुआयामी योजनाओं  को आकार देने का आधार भी यही होगा। केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने ही इम्पैक्ट गुरु का लोकार्पण किया। वे भी चाहती हैं कि सरकार के साथ-साथ गैर सरकारी संगठनों और आम नागरिक को सेवा और जनकल्याण के कार्यों के लिये  क्राउडफंडिंग को बढ़ावा देना चाहिए।

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार भारत में क्राउडफंडिंग के लिए लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है। वर्ष-2014 में 167 प्रतिशत इजाफे के  साथ 16.2 करोड़ डाॅलर रहा। वर्ष-2015 में यह 34.4 करोड़ डाॅलर हो गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में दुगना है। इन आंकड़ों से उजागर होता है कि क्राउडफंडिंग के प्रति दुनिया में न केवल बड़े दानदाताओं में बल्कि मध्यमवर्ग में भी देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।  पीयूष जैन इम्पैक्ट गुरु के माध्यम से बच्चों से जुड़े उपक्रमों के लिए निकट भविष्य  में एक अभिनव आयोजन को लेकर दान उपलब्धता के लिए प्रयासरत है जिसके लिए हार्वर्ड क्लब आॅफ मुम्बई और आईवी प्लस नेटवर्क के साथ भागीदारी सुनिश्चित हुई है। बच्चों से जुडे अधिकारों और उनके उन्नत  शिक्षा के लिए पैसे जुटाने की यह भारतीय परिप्रेक्ष्य में अनूठी घटना होगी।

इम्पैक्ट गुरु मंच की कोशिश से भारत में 33 लाख गैर लाभकारी संगठनों से जुड़ी समस्याओं को सुलझाया जा सकेगा। क्योंकि इन गैर लाभकारी संगठनों के सम्मुख धन उगाने के परम्परागत तरीकें बहुत खर्चीले हैं, जो कुल धन का खर्च 35 प्रतिशत तक है, जिसे नई तकनीक के अंतर्गत 5 प्रतिशत तक किया जाएगा। इससे एक बड़ी समस्या का समाधान इम्पैक्ट गुरु के द्वारा संभव हो सकेगा। इम्पैक्ट गुरु काॅलेज और उच्च शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ युवा प्रोफेशनल के बीच व्यापक पहुंच स्थापित कर उनमें क्राउडफंडिंग की शक्ति के माध्यम से उन्हें सोशल मीडिया के लिए जागरूक किया जा रहा है।

क्राउडफंडिंग की परंपरा को भारत में व्यापक बनाने के लिये इम्पैक्ट गुरु के साथ-साथ अनेक संगठन और लोग विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय  हैं। अब तक इस परम्परा के तहत किसी परियोजना या व्यवसाय के लिए लोग एक साथ मिलकर आर्थिक सहयोग करते थे।   दुनिया की सबसे बड़ी क्राउडफंडिंग कंपनी ‘किकस्टार्टर’ कमोबेश हर क्षेत्र जैसे फिल्म, पत्रकारिता, संगीत, कॉमिक, वीडियो गेम से लेकर विज्ञान और तकनीक के लिए क्राउडफंडिंग करती है। किकस्टार्टर ने पिछले वर्ष तक 224 देशों के 58 लाख लोगों से तकरीबन दस अरब रुपये जुटाए हैं।  इसका इस्तेमाल दो लाख  लोगों ने विभिन्न योजनाओं के लिए किया। अब भारत में इम्पैक्ट गुरु भी कुछ ऐसा ही अनूठा, विलक्षण और संगठित प्रयास करने को तत्पर दिखाई दे रहा है।  आज के समय में क्राउडफंडिंग एक ऐसा मंच माना जा रहा है, जिसके जरिए उन बहुआयामी योजनाओं को पूरा किया जा सकता है जो आधी-अधूरी हालात में है।  ऐसे अनेक सार्वजनिक काम हैं जो निर्मित हो चुके हैं एवं फण्ड की कमी के कारण चलयमान नहीं हो पाए हैं, उन्हें सफलतापूर्वक क्रियाशील बनाने में क्राउड फंडिंग रामबाण औषधि का कार्य करेंगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी क्राउडफंडिंग के जरिये सार्वजनिक उपक्रमों को अधिक सशक्त बनाने के लिये उत्साहित दिखाई देते हैं।  आनलाइन के इस युग में क्राउड फंडिंग का भविष्य उज्ज्वल ही दिखाई दे रहा है। हाल में नेपाल में आए भूकंप पीडि़तों के लिए एक आठ साल के बच्चे ने 26 हजार अमेरिकी डॉलर (लगभग 26 लाख नेपाली रुपये) जुटाने का कारनामा कर  दिखाया है। उसने यह काम लोगों से चंदा एकत्रित (क्राउडफंडिंग) करके किया है। मैरीलैंड के रहने वाले नीव सराफ ने  इसके लिए अपने मित्रों समेत उनके परिजनों से संपर्क किया। हरियाणा के सिरसा जिले के एक गांव में गांववाले क्रा उडफंडिंग के जरिए 1 करोड़ रुपये इकट्ठा कर एक पुल का निर्माण करा रहे हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जो क्राउडफंडिंग की उजली सुबह की आहट कहे जा सकते हैं।

पहले भारत में ऑफलाइन क्राउडफंडिंग होती थी पर अब समय बदल रहा है लोग ऑनलाइन क्राउडफंडिंग को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। चंदे से हुई शुरुआत भले ही आज के समय में क्राउडफंडिंग के रूप में विकसित एवं लुभावनी हो गई है,  लेकिन भारत जैसे देश में बिना जागरूकता इसकी राह अभी बहुत आसान नजर नहीं आ रही है। इसीलिये पीयूष जैन भारत सरकार को  क्राउडफंडिंग के लिए नीति बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। उनका मानना है कि सरकार को क्राउडफंडिंग  के लिए योजना बनानी  चाहिए। क्राउड फंडिंग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। लोग जिन्हें व्यक्तिगत रूप  से नहीं जानते उनके लिए दान करना नहीं चाहते हैं। इस स्थिति में लोगों को दान कराने के लिए राजी करना  चुनौती भरा होता है। जब सरकार की ओर से इसको प्रोत्साहन मिलेगा और इसकी सुनियोजित योजना सामने आएगी तो लोगों का विश्वास जागेगा।

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि तकनीक के  मामले में भारत की दुनिया में अलग पहचान है। भारत के सुनहरे भविष्य के लिए क्राउडफंडिंग अहम  भूमिका निभा सकती है। क्योंकि क्राउडफंडिंग  से भारत में दान का मतलब सिर्फ गरीबों और लाचारों की मदद करना समझते आ रहे  हैं जो कि अब कला, विज्ञान और मनोरंजन  को समृद्ध  करने की भी हो जायेगी। ऐसा होने से  क्राउडफंडिंग की उपयोगिता  एवं महत्ता सहस ही बहुगुणित होकर सामने आएंगी। हम जहां रहते हैं वहां  एक-दूसरे की मदद के बिना समाज नहीं चल सकता. अगर लोग इस तरह की मदद के लिए आगे नहीं आएंगे तो पैसों की कमी के चलते अनेक सामाजिक और सार्वजनिक इकाइयां मरनासन्न होकर रसातल में चली जाएगी।

(ललित गर्ग)



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