पत्नी के सिंदूर लगाने से इनकार का मतलब वह शादीशुदा जिंदी आगे नहीं जीना चाहती, यह तलाक का आधार

पत्नी के सिंदूर लगाने से इनकार का मतलब वह शादीशुदा जिंदी आगे नहीं जीना चाहती, यह तलाक का आधार


  • 2012 में शादी हुई थी, जल्द ही पति और पत्नी अलग हो गए थे, इसके बाद महिला ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था
  • फैमिली कोर्ट ने पति को तलाक देने से इनकार कर दिया था, इस पर भी हाईकोर्ट ने कहा- साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं हुआ

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 10:21 PM IST

गुवाहाटी. हाईकोर्ट ने कहा है कि सिंदूर और चूड़ी पहनने से पत्नी के इनकार का मतलब है कि वह अपनी शादीशुदा जिंदगी आगे जारी रखना नहीं चाहती है और यह तलाक दिए जाने का आधार है।
एक व्यक्ति ने गुवाहाटी हाईकोर्ट में तलाक के लिए याचिका दाखिल की थी। इस पर चीफ जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस सौमित्र सैकिया ने पत्नी के सिंदूर लगाने से इनकार को एक साक्ष्य के तौर पर माना।

“चूड़ी ना पहनने का मतलब, शादी से इनकार’
बेंच ने अपने फैसले में कहा- हिंदू रीति-रिवाजों के हिसाब से शादी करने वाली महिला अगर सिंदूर नहीं लगाती और चूड़ी नहीं पहनती है तो ऐसा करने से वह अवविवाहित लगेगी और ये प्रतीकात्मक तौर पर इसे शादी से इनकार माना जाएगा। ऐसा करना महिला के इरादों को साफ जाहिर करता है कि वह पति के साथ अपना वैवाहिक जीवन आगे जारी रखना नहीं चाहती है।
कोर्ट ने कहा कि इन हालात में पति का पत्नी के साथ रहना महिला द्वारा पति और उसके परिवार को प्रताड़ना देना ही माना जाएगा।

“फैमिली कोर्ट ने मूल्यांकन में गलती की’
अदालत ने आगे कहा कि फैमिली कोर्ट ने इस मामले में साक्ष्यों का मूल्यांकन सही दिशा में करने में गलती की है। दरअसल, फैमिली कोर्ट ने पति द्वारा दायर की गई तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया था। अपील करने वाले की शादी 2012 में हुई थी। इसके बाद दोनों पति-पत्नी जल्द ही अलग हो गए थे। इसके बाद महिला ने घरेलू हिंसा के आरोप लगाए थे और पति ने तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी।



Source link

सभी अपडेट के लिए हमें Facebook और Twitter पर फ़ॉलो करें

राष्ट्र निर्माण में सहयोग के लिए करें. (9887769112)
हमारी स्वतंत्र पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करे



Leave a Comment