पूर्वी लद्दाख में सर्दी के महीनों में भी सेना के जवानों की तैनाती बरकरार रखने की तैयारी, वायुसेना भी हाईअलर्ट पर रहेगी

पूर्वी लद्दाख में सर्दी के महीनों में भी सेना के जवानों की तैनाती बरकरार रखने की तैयारी, वायुसेना भी हाईअलर्ट पर रहेगी


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नई दिल्ली5 मिनट पहले

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भारत ने चीन से साफ शब्दों में कहा था कि चीन को फिंगर-4 और फिंगर-8 के बीच के इलाकों से अपनी सेना को वापस बुलाना होगा। (फाइल फोटो)

  • लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर तनाव जारी रहने की आशंकाओं के बीच सेना की तैयारी
  • हिंद महासागर में इंडियन नेवी भी आक्रामक रवैये के साथ चीन पर दबाव बनाती रहेगी

लद्दाख सीमा पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच जारी तनाव के बीच भारत ने चीन को अपनी ताकत दिखाने की पूरी तैयारी कर ली है। भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख के अहम इलाकों में कड़ाके की सर्दी में भी सैनिकों की तैनाती बरकरार रखने की तैयारी कर ली है। टैंक और अन्य हथियारों को भी यहां तैनात किया जाएगा।

सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी ने बताया कि सीमा विवाद को लेकर पहाड़ी इलाके में जारी तनाव के जल्द खत्म न होने की आशंकाओं के मद्देनजर सेना ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है। इलाके में वायु सेना को भी अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है। वहीं, हिंद महासागर में इंडियन नेवी भी आक्रामक रवैये के साथ चीन पर दबाव बनाती रहेगी।

खास तरह की तैयारी की जरूरत
सूत्रों के मुताबिक, सर्दी के मौसम में ऊंचाई वाली जगहों पर जहां तापमान माइनस 20 डिग्री तक पहुंच जाता है, वहां सेना और वेपनरी की तैनाती के लिए खास तैयारी करनी होगी। सरकार ने ऊंचाई वाली जगहों के लिए खास कपड़े और जरूरी सामानों का इंतजाम करने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है।

सूत्रों के मुताबिक, चीनी सेना गलवान घाटी समेत कई इलाकों से तो पीछे हट गई है। लेकिन, पैंगोंग त्सो में फिंगर एरिया से चीनी सेना भारत की मांग के मुताबिक पीछे हटने को तैयार नहीं है। जबकि, भारत ने चीन से साफ शब्दों में कहा था कि चीन को फिंगर-4 और फिंगर-8 के बीच के इलाकों से अपनी सेना को वापस बुलाना होगा।

पैंगोंग त्सो से पीछे हटने को तैयार नहीं चीन
सीमा विवाद को लेकर 24 जुलाई को भारत और चीन के बीच डिप्लोमेटिक लेवल की बातचीत हुई थी। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने कहा था कि दोनों देश आपसी समझौतों और प्रोटोकॉल के मुताबिक, एलएसी से अपने-अपने सैनिकों को जल्द से जल्द पूरी तरह पीछे हटाने के लिए तैयार हो गए हैं।

उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच कमांडर लेवल की अगली बातचीत अगले हफ्ते होने की संभावना है। मीटिंग में फिंगर पॉइंट और पैंगोंग त्सो से पूरी तरह से सेना को पीछे हटाने के मुद्दे को हल करने की कोशिश की जाएगी।

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