भागवत सुनने से मन को मिलती है शांति- आचार्य रमेश शर्मा

हिण्डौन सिटी। वर्धमान नगर के गायत्री मैरिज गार्डन में तीसरे दिन रविवार को श्रीमद् भागवत कथा के दौरान पंडित रमेश चंद्र आचार्य पाँचोली वाले ने सुखदेव महाराज व राजा परीक्षित केेे प्रसंग का वर्णन किया। परीक्षित जब बड़े हुए भरा पूरा परिवार था। सुख वैभव से समृद्ध राज्य था। वे जब 60 वर्ष के थे एक दिन वे ऋषि से मिलने उनके आश्रम गए।

उन्होंने उन्हें आवाज लगाई लेकिन तप में लीन होने के कारण मुनि ने प्रति उत्तर नहीं दिया। राजा परीक्षित स्वयं का अपमान मानकर निकट मृत पड़े सर्प को मुनि के गले में डाल दिया और वहां से चले गए। अपने पिता के गले में मृत सर्प को देख मुनि के पुत्र ने श्राप दे दिया कि जिस किसी ने भी मेरे पिता के गले में मृत सर्प डाला है। उसकी मृत्यु 7 दिनों के अंदर सांप के डसने से हो जाएगी।

इस अवसर पर कथा स्थल पर राजा परीक्षित एवं सुखदेव जी की सजीव झांकी सजाई गई। कथा सुनने के लिए पांडाल में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। आचार्य ने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापी है जो घट घट में विराजमान है। सती चरित्र कथा, जय विजय श्राप, कपिल उपाख्यान कथा व भगवान शिव व पार्वती की सुनाई गई अमर कथा का विस्तार से वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि भागवत भगवान का रूप है। नित्य नियम के साथ भागवत सुनने से मन को शांति तो मिलती है ही साथ ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इस कथा कथा कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विद्वानों का आचार्य पंडित रमेश चन्द्र द्वारा स्वागत किया गया।इस मौके पर दीनदयाल शर्मा, मदनमोहन शर्मा,रामगोपाल शर्मा, राजेन्द्र शर्मा, सुरेंद्र मोहन, पुरषोत्तम, मुकुट बिहारी सहित सैकड़ों की संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

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