लॉकडाउन के पहले के स्तर के करीब पहुंचा ई-वे बिल जनरेशन, जून में 4.27 करोड़ बिल बने, कोरोना से पहले मासिक 5.2 करोड़ बिल बनते थे

लॉकडाउन के पहले के स्तर के करीब पहुंचा ई-वे बिल जनरेशन, जून में 4.27 करोड़ बिल बने, कोरोना से पहले मासिक 5.2 करोड़ बिल बनते थे


  • जून के बिल से 12.40 लाख करोड़ रुपए के सामानों की आवाजाही हुई
  • रोजाना औसतन 14.26 लाख बिल बना, 30 जून को 18.32 लाख बिल बना

दैनिक भास्कर

Jul 06, 2020, 03:57 PM IST

मुंबई. देश में कारोबारी गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। लॉकडाउन खुलने की शुरुआत के साथ ही वस्तुओं की आवाजाही में तेज उछाल आया है। जीएसटी नेटवर्क (GSTN) ने कहा है कि जून में कुल 4.27 करोड़ ई-वे बिल जारी हुए हैं। जबकि कोरोना से पहले मासिक 5.2 करोड़ बिल बनते थे।

टैक्स चोरी रोकने के लिए ई-वे बिल सिस्टम बना था

बता दें कि टैक्स चोरी को रोकने के लिए सरकार ने ई-वे बिल का सिस्टम लागू किया था। यह राज्यों के भीतर और राज्यों के बाहर जानेवाले सामानों पर लागू होता है। अगर सामान की कीमत 50 हजार रुपए से ज्यादा है तो इस बिल को सामान के साथ रखना होता है। इस बिल की वैलिडिटी सामानों की आवाजाही की दूरी पर निर्भर होती है। इस बिल के जनरेट होने से अर्थव्यवस्था में तेजी या मंदी की बात का पता चलता है।

कोरोना से पहले की तुलना में जून में 77 प्रतिशत बिल बना 

जीएसटी नेटवर्क की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक जानकारी के मुताबिक जून में ई-वे बिल के बनने से 12.40 लाख करोड़ रुपए से अधिक के सामानों की आवाजाही हुई है। इस दौरान रोजाना औसतन 14.26 लाख ई-वे बिल जारी हुए। यह आंकड़ा बताता है कि लॉकडाउन से पूर्व ई-वे बिल के माध्यम से जितना कारोबार हो रहा था, जून में उसका करीब 77 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर लिया गया है। हालांकि सबसे अधिक 30 जून को एक ही दिन में कुल 18.32 लाख बिल बने और इनका वैल्यू 54,500 करोड़ रुपए था।

मार्च में 4 करोड़ ई-वे बिल बने थे

जीएसटीएन के मुताबिक इस वर्ष मार्च में चार करोड़ ई-वे बिल जारी हुए थे और उनके माध्यम से 11.43 लाख करोड़ रुपए मूल्य के सामानों की आवाजाही हुई थी। उसके मुकाबले जून का आंकड़ा ज्यादा है। हालांकि, लॉकडाउन की अवधि के दौरान अप्रैल में सिर्फ 84.53 लाख ई-वे बिल जारी हुए थे जिनकी कुल रकम 3.90 लाख करोड़ रुपए थी। इसी दौरान मई में 8.98 करोड़ रुपए मूल्य के ई-वे बिल जारी हुए थे।

जनवरी में 5.61 करोड़ ई-वे बिल बने थे

लॉकडाउन से पूर्व की अवधि में इस वर्ष जनवरी में जारी हुए ई-वे बिल की संख्या 5.61 करोड़ और उनकी कुल रकम 15.71 लाख करोड़ रुपए थी। इस वर्ष फरवरी में कारोबारियों और ट्रांसपोर्टर्स ने 5.63 करोड़ ई-वे बिल लिए और उन्होंने 15.39 लाख करोड़ रुपए मूल्य के माल की ढुलाई की। जीएसटीएन के मुताबिक लॉकडाउन के पहले चरण यानी 25 मार्च से 14 अप्रैल के दौरान जारी हुए ई-वे बिल की संख्या में एकाएक बड़ी कमी आई और यह सिर्फ 1.72 लाख रह गया।

लॉकडाउन के दूसरे चरण में 3.51 लाख बिल औसतन रोज बना

लॉकडाउन के दूसरे चरण (15 अप्रैल-03 मई) के दौरान इसमें सुधार आया और संख्या बढ़कर 3.51 लाख पर पहुंची। लॉकडाउन के तीसरे चरण (04-14 मई) के दौरान जारी हुए ई-वे बिल का आंकड़ा थोड़ा और सुधरकर 6.75 लाख और चौथे चरण (15-31 मई) में 9.84 लाख तक पहुंचा। जून में अनलॉक-1.0 के शुरू होते ही कारोबारी गतिविधियों में तेज उछाल दर्ज की गई। गौरतलब है कि इस वर्ष जून में जीएसटी कलेक्शन भी बढ़कर 90,917 करोड़ रुपए रहा।

इस वर्ष अप्रैल में यह आंकड़ा सिर्फ 32,294 करोड़ रुपए और मई में 62,009 करोड़ रुपए रहा था।



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