आखिर महिला सशक्तिकरण का संदेश किस प्रकार देना चाहती है जयपुर पुलिस?

बालिका को 8 घंटे तक जबरन बंधक बनाने की दोषी फाइनेंस कंपनी एसके फिनकॉर्प के साथ मिलकर मनाया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

जितेन्द्र शर्माh

जयपुर। ‘आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर’ के ध्येय वाक्य को धत्ता बताते हुए कल रविवार को जयपुर कमिश्नरेट ने 9 माह की अबोध बालिका को 8 घंटे तक जबरन बंधक बनाने की दोषी फाइनेंस कंपनी एसके फिनकॉर्प के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया।

जयपुर के एमआई रोड स्थित चैम्बर भवन के भैरोसिंह सभागार में हुए कार्यक्रम में जयपुर पुलिस के आला अधिकारियों और दोषी कंपनी के कर्ता-धर्ताओं की सांठगांठ जगजाहिर हो रही थी। महिला पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने के साथ ही उन्हें हैल्मेट वितरित करने के इस समूचे आयोजन का खर्चा एक दूधमुंही बच्ची पर अत्याचार करने वाली सूदखोर कंपनी एसके फिनकॉर्प (एसके फाइनेन्स) ने उठाया।

गौरतलब है कि 15 फरवरी 2020 को अजमेर के रूपनगढ़ में नाै माह की बच्ची घर में साे रही थी और निजी एसके फिनकॉर्प फाइनेंस कंपनी के लाेगाें ने मकान काे सीज कर दिया। बच्ची की मां-दादा सहित अन्य परिजन चीखते-चिल्लाते रहे कि बच्ची काे ताे बाहर निकाला जाए, ताला खाेला जाए, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। परिजन पुलिस व एसडीओ के पास पहुंचे ताे वहां भी सुनवाई नहीं हुई।

आखिर परिजनों ने अजमेर कलेक्टर विश्वमाेहन शर्मा के पास गुहार लगाई। तब कहीं जाकर ताले खुलवाए और बच्ची को निकाला। बच्ची करीब 8 घंटे तक घर में और परिजन बाहर तड़पते रहे। बच्ची के दादा ओमप्रकाश के मुताबिक कोर्ट से स्टे के बावजूद फाइनेंस कंपनी ने मकान सीज किया। सबकाे बाहर पटक दिया। 9.5 लाख का कर्ज था जिस पर 4.5 लाख रु. चुकाए जा चुके थे।

इस प्रकरण में पुष्कर विधायक बच्ची को लेकर राजस्थान विधानसभा में भी पहूंचे थे और मामले को जोरशोर से उठाया था। उस दौरान यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल बाेले कि एसके फिनकॉर्प फाइनेंस कंपनी के खिलाफ धारा 342 में रोंगफुल कन्फाइनमेंट (गलत कारावास) की कार्रवाई की गई है। पुलिस जांच में बच्ची तीन-चार घंटे बंद होना पाया गया। इस पर विधायक रावत ने विराेध किया और कहा था कि पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने गलत तथ्य दिए। बच्ची सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक बंद रही थी।

अब सबसे रोचक यह है कि जिस कंपनी ने कर्जवसूली के लिए 9 माह की अबोध बालिका पर घोर अत्याचार किया, उस कंपनी को महिला दिवस समारोह की प्रायोजक बनाकर जयपुर पुलिस आखिर महिला सशक्तिकरण का संदेश किस प्रकार देना चाहती है?

कानूनविदों के अनुसार किसी दोषी व्यक्ति या संस्था से पुलिस किसी भी प्रकार का लाभ तब तक नहीं ले सकती, जब तक कि आरोपी को न्यायालय द्वारा दोषमुक्त करार नहीं दिया जाता। एसके फिनकॉर्प को पुलिस के सम्मान समारोह का मुख्य प्रायोजक या सहभागी बनाने के पीछे की कहानी वर्दीधारी अधिकारियों पर सवालिया निशान छोड़ती नज़र आ रही है।

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