भाजपा ने किया छोटे अखबारों का अपमान

बड़े उद्योगों को ही लाभ पहुंचाने की नीति

जयपुर। इससे तो यही साबित होता है कि भारतीय जनता पार्टी की रीति नीति सिर्फ चंद उद्योगपतियों को ही लाभ पहुंचाने की रही है। भाजपा पर अंबानी, अडानी को ही लाभ पहुंचाने के आरोप गलत नहीं है। राजस्थान भाजपा भी इसी नीति पर चल रही है और गरीब व मेहनतकश लघु उद्यमियों की मेहनत व ईमानदारी की जरा भी कद्र नहीं करती है।

मामला लोकसभा चुनावों के मतदान के विज्ञापन बांटने का है। इस मामले में कांग्रेस ने तो अपना वादा निभाते हुए साबित कर दिया कि वह वाकई सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है और गरीब व लघु उद्यमियों के लिए उसके मन में सम्मान और सहयोग का ही भाव है। लोकसभा चुनावों में जनता को अपनी अपील पहुंचाने के लिए दोनों ही पार्टियों ने बड़ा विज्ञापन अभियान चलाया है।

इसके लिए सभी छोटे बड़े समाचार पत्रों में पार्टियों ने मतदान की अपील के विज्ञापन जारी किए हैं, लेकिन यहां राजस्थान भाजपा कार्यालय ने लघु समाचारों पत्रों के विज्ञापन के प्रस्तावों पर न सिर्फ इनकार किया है, बल्कि अपमान जनक तरीके से उन्हें अनेक चक्कर लगवाकर निराश लौटाया है।

जहां राजस्थान कांग्रेस ने उनके यहां विज्ञापन के लिए आए हर छोटे बड़े समाचार पत्र प्रकाशक को विज्ञापन देकर उनका मान रखा है। कांग्रेस के मीडिया विभाग ने किसी में फर्क नहीं करते हुए छोटे समाचार पत्रों को भी पार्टी के विज्ञापन पर अग्रिम भुगतान कर सहयोग किया है। वहीं केन्द्र में राज में होने बावजूद भाजपा के प्रदेश कार्यालय से किसी भी प्रकार का विज्ञापन नहीं देने का जवाब दिया जा रहा है।

29 अप्रेल के मतदान के लिए कांग्रेस कार्यालय की ओर से सभी को छोटे बड़े विज्ञापन दिए गए, लेकिन भाजपा कार्यालय से लघु पत्रों को किसी प्रकार का विज्ञापन जारी नहीं किया गया। इससे लघु समाचार पत्र प्रकाशकों में भाजपा के प्रति नाराजगी नजर आ रही है। मोदी के नाम पर जीत होने के अग्रिम अहंकार में डूबी प्रदेश भाजपा को लघु समाचार पत्रों की मेहनत और संघर्ष पूर्ण कार्य का जरा भी मान नहीं है।

प्रदेश भाजपा की मीडिया की ओर से एक ही जवाब दिया जा रहा है कि उन्हें छोटे मोटे अखबारों में विज्ञापन छपाने की जरूरत नहीं है। मोदी के नाम पर वैसे ही सभी जीत जाएंगे। यदि विज्ञापन देने ही है तो बड़े समाचार पत्रों में ही दिए जाएंगे। प्रदेश भाजपा के प्रभारी केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ही यह तय कर रहे हैं कि किसे विज्ञापन देना है और किसे नहीं।

उनके कार्यालय में जितने भी छोटे अखबारों से विज्ञापन के लिए प्रस्ताव आए हैं, सब बेकार और बकवास हैं। इन्हें विज्ञापन देना पैसा बर्बाद करने के बराबर है। उनसे यह भी कहा गया है कि उनके हाथ में कुछ नहीं है, ज्यादा जानकारी के लिए प्रकाश जावडेकर से ही सम्पर्क करें। प्रदेश भाजपा की इस कार्यशैली से तो यही लगता है कि उन्हें अंबानी, अडानी जैसे बड़े उद्योगपतियों या बड़े अखबारों की ही फिक्र है। छोटों से कोई सरोकार नहीं है।

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