आरक्षण की समीक्षा से ही मिटेगा जाति एवं वर्ग भेद

समय और शिक्षा के साथ हमारे समाज की सोच-विचार, रहन-सहन, खान-पान में बहुत बदलाव आ गया है। वर्तमान समय में लोगों के व्यवसाय, पहनावा, रीति-रिवाज, रहन-सहन, खान-पान को देखकर यह नहीं बताया जा सकता कि किसकी कौनसी जाति है। फिर भी हमारे देश में जातियोंं के आधार पर अलग-अलग आरक्षण दिया जा रहा है। जैसा की सभी जानते हैं कि आजादी से पहले हमारे समाज में उच्च और निम्न जातियां थीं। समाज में जाति के आधार पर भेदभाव किया जाता था। निम्न जाति वालों को हीन भावना के साथ देखा…

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