मसूद अजहर पर अब भी नरम है चीन, ग्लोबल आतंकी घोषित होने से बचाने की तैयारी

बीजिंग/नई दिल्ली। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को यूएन (यूनाइटेड नेशंस) से ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कराने की भारत की कोशिशों को फिर झटका लग सकता है। चीन ने सोमवार को यह संकेत दिया कि वह इस मामले में फिर रोड़ा अटका सकता है। इसी साल अगस्त में चीन ने अपनी तकनीकी रुकावट (technical hold) को 3 महीने के लिए बढ़ा दिया था। 2 नवंबर को यह वक्त खत्म हो रहा है। इससे पहले, फरवरी में अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने यूएन में इस मामले में प्रपोजल पेश किया था। चीन पिछले 2 साल से इस प्रपोजल में यह कहकर रुकावट पैदा कर रहा है कि इस मामले में यूएन सिक्युरिटी काउंसिल के मेंबर्स में रजामंदी नहीं है।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन हुआ चुनयिंग ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “हमने इस मंच (यूएन) पर इस मामले को लेकर अपनी स्थिति कई बार साफ की है। सिक्युरिटी काउंसिल के इससे जुड़े रिजोल्यूशंस में हमारी शर्त का साफ तौर पर जिक्र है, 1267 कमेटी में भी जब यह मामला आया तो हमने अपना रुख साफ कर दिया।”

यह पूछने पर कि क्या जब गुरुवार को यह मामला 1267 कमेटी के सामने आएगा तो चीन फिर अजहर पर बैन को ब्लॉक करेगा, इस पर हुआ ने कहा, “संबंधित देशों के एप्लिकेशन पर रजामंदी अब तक नहीं बन सकी है। चीन ने तकनीकी रोड़ा लगाते हुए सभी पक्षों को इस पर विचार के लिए ज्यादा वक्त दिया था।”

1267 कमेटी ही करती है फैसला :

आतंकियों और आतंकी संगठनों पर बैन लगाने का फैसला UNSC की 1267 कमेटी ही करती है। अक्टूबर 1999 में यूएन सिक्युरिटी काउंसिल ने 1267 रिजोल्यू्शन पास किया था। इसी के तहत ओसामा बिन लादेन को आतंकी घोषित करने के बाद उस पर और उसके संगठन अल कायदा पर बैन लगाया गया था।

भारत ने पिछले साल मार्च में रखा था प्रपोजल :

भारत ने पिछले साल मार्च में अजहर पर बैन लगाने के लिए यूनाइटेड नेशंस में प्रपोजल रखा था। उस वक्त चीन ने इसे 6 महीने (सितंबर तक) के लिए रोक दिया था। 15 सदस्यों वाली सिक्युरिटी काउंसिल में चीन इकलौता देश था, जिसने विरोध किया था। काउंसिल के बाकी 14 मेंबर ने इस प्रपोजल का सपोर्ट किया था। फिर सितंबर में इसे 3 और महीने के लिए रोक दिया था। पिछले साल 31 दिसंबर को यह रोक खत्म हुई थी। इसके बाद अमेरिका, फ्रांस और यूके मिलकर फिर से एक नया प्रपोजल लाए थे।

 

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