त्याग करना या करवाना नहीं, त्याग की प्रभावना बढ़ाना ही उत्तम त्याग धर्म – मुनि विभंजन सागर

जयपुर। मानसरोवर स्थित वरुण पथ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे मुनि विश्वास सागर एवं मुनि विभंजन सागर महाराज ससंघ सानिध्य में चल रहे दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन ” उत्तम त्याग धर्म ” का जयकरों के साथ गुणगान किया गया। इस अवसर पर धर्म की प्रभावना देखने को मिल रही थी बड़ी संख्या में जैन श्रावक और श्राविकाएँ सम्मिलित होकर दश धर्म की प्रभावना में अग्रसर हो रहे थे।

मंगलवार को दश धर्म के आठवें दिन ” उत्तम त्याग धर्म ” मंगल शुरुवात प्रातः 6 बजे से मूलनायक महावीर भगवान के स्वर्ण एवं रजत कलशो एवं मुनि विश्वास सागर महाराज के मुखारविंद शान्तिधारा के आयोजन के साथ प्रारम्भ हुई जिसके पश्चात् ” उत्तम त्याग धर्म एवं कर्म दहन ” विधान पूजन का आयोजन हुआ, इस विधान पूजन में सौधर्म इंद्र रविन्द्र, अनूप, अखिलेश, जया जैन परिवार एवं नरेंद्र मंजू शाह परिवार सहित उपस्थित सभी श्रावको ने त्याग धर्म की प्रभावना करते हुए श्रद्धा – भक्ति के साथ पूजन – अर्चना की और अर्घ चढ़ाये। इस बीच प्रातः 8.30 बजे मुनि विभंजन सागर महाराज ने ” उत्तम त्याग धर्म ” पर अपने उपदेश में कहा की

” चिड़ी चोंच भर ले गयी नदी न घटियों नीर। देता दौलत ना घटे कह गये दा कबीर। ” ” दान 4 प्रकार के होते है – औषधदान, शास्त्रदान, अभयदान और आहारदान। ” उत्तम त्याग धर्म ” दान की महिमा बतलाता है, ” अनुग्रहार्य स्वस्यति सर्गो दानम ” स्व और पर के अनुग्रह के लिए अपने धन का त्याग करना दान कहलाता है। गृहस्थ जीवन का मुख्य कर्तव्य दान और पूजा होता है, क्योकि ” धन उसका नहीं है जिसके पास वह है, अपितु उसका ही धन सार्थक होता है, जो उसका सदुपयोग करता है। ” धन की तीन गति होती है – दान, भेग और नाश। अगर धन का सही उपयोग ना हुआ तो उसकी तीसरी गति होती है।

समुन्द्र का जल खारा और नदियों का पानी मीठा होता है क्योकि समुन्द्र अपने पानी को संचित करके रखता है इसलिए खारा होता है जो खर्च करेगा अर्थात उचित उपयोग में लेगा उसका बढ़ता है और जो संचित करता है अर्थात सही उपयोग में नहीं लेता है उसका नष्ट होता है। ” जोड़ कर रख लो चाहे लाख हिरे – मोती। मगर याद रखना कफ़न में जेब नहीं होती। ” अतः दान करके चौगुना पुण्य कमाकर अपना जीवन सार्थक करना चाहिए। उसे ही उत्तम त्याग धर्म कहा गया है। “

मंत्री जेके जैन ने बताया कि मंगलवार से 3 दिन के ” झर का तेले ” का उपवास प्रारम्भ हो जाएंगे। जिसे बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रख दशलक्षण महापर्व की प्रभावना में भाग लेते है। दशलक्षण महापर्व और तीन दिन के उपवास करने वालो का सामूहिक पारणा शुक्रवार 13 सितम्बर को चातुर्मास व्यवस्था समिति और प्रबन्ध कार्यसमिति के संयुक्त तत्वाधान में करवाया जायेगा साथ ही सभी त्यागी-वृत्तियों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया जाएगा। बुधवार को दश धर्म के नवें दिन ” उत्तम आकिंचन धर्म ” मनाया जायेगा और कर्म निर्जरा विधान पूजन किया जायेगा।

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