भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक त्योहार है रक्षाबंधन

भारत त्योहारों का देश है। यहां विभिन्न प्रकार के त्योहार मनाए जाते हैं। हर त्योहार अपना विशेष महत्त्व रखता है। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक त्योहार है। यह भारत की गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक त्योहार भी है। यह दान के महत्त्व को प्रतिष्ठित करने वाला पावन त्योहार है । रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण मास में ऋषिगण आश्रम में रहकर अध्ययन और यज्ञ करते थे। श्रावण-पूर्णिमा को मासिक यज्ञ की पूर्णाहुति होती थी। यज्ञ की समाप्ति पर यजमानों और शिष्यों को रक्षा-सूत्र बाँधने…

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मनचाहा “वर” पाने के लिए “कुंवारी कन्याएं” भी रखती हैं तीज का व्रत

गांव-कस्बा हो या मेट्रो शहर, त्योहारों की धूम तो हर जगह रहती है। वैसे भी जब मौसम हो त्योहारों के शुरू होने का तो जोश और उत्साह बढ़ जाता है। तीज के त्योहार की धूम भी इन दिनों हर जगह मची होती है। तीज के त्योहार पर भी थोड़ी-बहुत आधुनिकता की मार पड़ गई है लेकिन आधुनिकता ने इसके उत्साह में कोई कमी नहीं की है। बेशक वक्त की कमी के चलते कभी सामूहिक तौर पर मनाया जाने वाला यह त्योहार अब घरों के भीतर तक सिमट गया है। हालांकि,…

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मानवता के लिए खतरा है अंधविश्वास!

धार्मिक अंधविश्वास और कट्टरपन हमारी प्रगति में बहुत बड़े बाधक हैं । वे हमारे रास्ते के रोड़े साबित हुए हैं और उनसे हमें हर हाल में छुटकारा पा लेना चाहिए। जो चीज आजाद विचारों को बर्दाश्त नहीं कर सकती, उसे समाप्त हो जाना चाहिए । इसी प्रकार की और भी बहुत-सी कमजोरियां हैं, जिन पर हमें विजय पानी है। इस काम के लिए सभी समुदायों के क्रान्तिकारी उत्साह वाले नौजवानों की आवश्यकता है। यह बात शहीद भगतसिंह के संगठन “नौजवान भारत सभा” के लाहौर से प्रकाशित घोषणा-पत्र में कही गई…

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Article 35A : आखिर क्यों मचा है अनुच्छेद 35ए पर संग्राम ?

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 35A को वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई टल गई। मामले की अगली सुनवाई अब 27 अगस्त को होगी। उस दिन कोर्ट इस मामले को संविधान पीठ में भेजने पर निर्णय दे सकता है। बता दें कि आर्टिकल को भेदभावपूर्ण बताते हुए दिल्ली के एनजीओ ‘वी द सिटिजन’ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इन सारी बातों के बीच में केवल एक ही बात कौंध रही है कि आखिर धारा 35A है…

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मृत्यु क्यों नहीं है जीवन का अंत ?

मृत्यु का अर्थ है भौतिक शरीर से आत्मा का जुदा होना है। मृत्यु नये और बेहतर जीवन का एक प्रारंभिक बिन्दु बन जाता है। यह जीवन के उच्च रूप का द्वार खोलता है। यह संपूर्ण जीवन का केवल एक प्रवेशद्वार है। जन्म और मृत्यु माया के मायाजाल हैं। जन्म लेते ही मरने की शुरुआत हो जाती है और मरते ही जीवन की शुरुआत हो जाती है। जन्म और मृत्यु इस संसार के मंच पर प्रवेश करने और बाहर जाने का द्वार मात्र है। वास्तव में ना तो कोई आता है…

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समय है “महिला सशक्तिकरण” की ओर कदम बढ़ाने का

‘परिदृश्य बदल रहा है। महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ रही है। वुमन एनवायरमेंट हो रहा है।’ ये कुछ चुनिन्दा पंक्तियां हैं जो यदा कदा अखबारों में, टीवी न्यूज़ चैनल पर, और नेताओं के मुँह से सुनी जाती रही हैं। अपने क्षेत्र में खास उपलब्धियां हासिल करने वाली कुछ महिलाओं का उदाहरण देकर हम महिलाओं की उन्नती को दर्शाते हैं। पर अगर आप ध्यान दें तो कुछ अद्भुत करने वाली महिलाएं तो हर काल में रही है। सीता से लेकर द्रौपदी, रज़िया सुल्तान से लेकर रानी…

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धर्म के नाम पर अभिव्यक्ति की आजादी और धर्म निरपेक्षता का नहीं उठाओ नाजायज फायदा

हमारे संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी और धर्म निरपेक्षता है लेकिन, संविधान ने किसी ने यह अधिकार नहीं दिया कि आप किसी की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करते हुए उसके धर्म के बारे में कुछ गलत बोलो। अपने वक्तवयों के कारण अकसर विवादों में रहने वाले छत्तीसगढ के सामाजिक कार्यकर्ता, राजनेता भगवाधारी संत स्वामी अग्निवेश की लोगों ने जमकर पिटाई कर दी थी क्योंकि स्वामी अग्निवेश हिन्दू होते हुए बीफ़ (गाय का मांस) खाने को सही बता रहे थे। श्रीनगर में उन्होंने कहा कि अयप्पा, तिरुपति, अमरनाथ अंधविश्वास है। अमरनाथ…

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गाय, गंगा, गीता और भारतवर्ष

भगवान कृष्ण द्वारा महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन को दिया गया गीता का ज्ञान भारत में ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में प्रत्येक धर्म के अनुयायियों द्वारा पढा जाता हैं क्योंकि गीता मात्र एक पुस्तक ही नहीं अपितु यह मानव को जीवन के उद्देश्य का ज्ञान करवाकर उसकी पूर्ति के लिए रास्ता बताती है, यह एक मार्गदर्शक की तरह है। भगवान कृष्ण (गोविन्द) ने भी गौपालन कर गायों का महत्तव बताया वहीँ हमारे देश के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा कि भारत में मनुष्य…

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गो-रक्षकों की हिंसा पर बरती जाए सख्ती

जब सड़क से लेकर संसद तक भीड़ की हिंसा के मामले चर्चा और चिंता का विषय बने हुए हैैं तब राजस्थान के अलवर जिले में गो-तस्करी के संदेह में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या ऐसी हिंसक घटनाओं को रोकने के पर्याप्त उपाय नहीं किए जाने की बात कहती है। इसका मतलब है कि गोरक्षा के नाम पर अराजकता का सहारा लेने वाले तत्व बेलगाम बने हुए हैैं। चिंताजनक यह है कि राजस्थान में तथाकथित गो-रक्षकों की हिंसा के मामले कुछ ज्यादा ही सामने आ रहे हैैं। अगर कानून एवं व्यवस्था…

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जरूरी है अविश्वास प्रस्ताव…!

लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका भी महत्तवपूर्ण होती है, सरकार में विश्वास नहीं होने पर वह अविश्वास प्रस्ताव द्वारा सरकार को हरा सकता है, उसे कमजोर बना सकता है। इसी के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, जिस पर गत शुक्रवार को लोकसभा में गरमा-गरम बहस हुई, जिसमें विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर विभिन्न आरोप लगाये, उनकी कमियों को उजागर किया तो सत्ता पक्ष ने अपने पर लगे आरोपों का खंडन कर उनका जवाब दिया हालांकि, इस बहस से सदन की गरिमा, संसदीय मर्यादा…

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