जिंदगी में जहर घोल रहा है मिलावट माफिया

खाद्य पदार्थों में मिलावट का स्वाद, जांच के नमूनों का परिणाम आज तक अघोषित

जयपुर (कपिल गुप्ता)। राजधानी सहित प्रदेश भर में मिलावट का जहर घुलता जा रहा है। इसको लेकर ना स्वास्थ्य विभाग गंभीर है और ना ही जिला एवं स्थानीय प्रशासन। स्वस्थ जिंदगी का आधार शुद्ध खानपान है, बाजारों में बिकने वाली मिठाइयों सहित खाद्य सामग्रीयों में मिलावट आज अछूती नहीं है। यह मिलावट इस तरह की जाती है कि मिठाइयों एवं खाद्य पदार्थों की जांच कर पाना मुश्किल हो जाता है।

बड़े-बड़े त्योहार आते ही मिलावट माफिया सक्रिय हो जाते हैं। केमिकल से बनी मिठाईयों और सिंथेटिक दूध सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट आमजन के शरीर मे जहर घोल रही है। त्योहार से कुछ दिन पहले ही सबसे अधिक खपत खोवे से बनी मिठाइयों की होती है। इसके लिए माफिया मिलावटी या सिंथेटिक खोवा का प्रयोग करते हैं। वहीं, बेसन का लड्डू, सोनपपड़ी आदि के लिए उपयोग किए जाने वाले बेसन में खेसारी दाल के आटा तक की मिलावट की जाती है। मिठाइयों को अधिक आकर्षक दिखाने के लिए उनमें मेटेलिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। छेना से तैयार होने वाली मिठाइयों मे सिंथेटिक छेना का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं, मिठाइयों को बनाने के लिए घी में भी मिलावट धड़ल्ले से की जा रही है।

अभी हाल ही कुछ दिन पहले करौली जिले के मासलपुर में स्वास्थ विभाग की टीम ने नकली पनीर बनाने की यूनिट पर छापा मारकर दो हजार लीटर मिलावटी पनीर को नष्ट करवाया। इसी तरह अलवर जिले के नीमराणा में गत बुधवार रात्रि को दूध के टेंकरों से दूध निकाल कर मिलावट करने के आरोप में तीन लोगों को भी हिरासत में लिया गया था। इससे यह साबित हो गया कि प्रदेश भर मिलावट माफियाओं की ओर से खपत बढ़ाने के लिए धडल्ले से मिलावटखोरी हो रही है। प्रशासन द्वारा जांच के लिए नमूने तो ले लिए जाते हैं लेकिन उनका कोई महत्व नहीं निकलता क्योंकि मिलावट किए खाद्य पदार्थों को अधिकारियों द्वारा दबा दिया जाता है।

शरीर पर पड़ रहा है विपरीत असर

बड़े-बड़े त्योहार आते ही नामी दुकानदार त्योहारी सीजन में मिलावट का कार्य शुरू कर देते हैं। ऐसे में स्वस्थ्य आदमी की सेहत पर क्या असर पड़ेगा उन्हें इसकी बिल्कुल भी परवाह नहीं है।खाद्य पदार्थों में मिलावट के चलते आमजन को अस्पतालो में भर्ती होना पड़ रहा है।

आज तक नहीं आया मिलावट का परिणाम

खाद्य पदार्थों में मिलावट का परिणाम आज तक नहीं आया। त्योहारी सीजन में मिलावटखोरों पर लगाम लगाने के लिए पूरा तंत्र एक है लेकिन, यह भी लाचार नजर आता है। जिन सेम्पलिंग प्रकिया के परिणाम 14 दिन के अंदर आने चाहिए महीनों तक पता नहीं चलता। अधिक समय होने के चलते सेम्पलिंग की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में आ जाती है।

सभी अपडेट के लिए हमें Facebook और Twitter पर फ़ॉलो करें

राष्ट्र निर्माण में सहयोग के लिए करें. (9887769112)
हमारी स्वतंत्र पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करे



Leave a Comment